Tuesday, 6 December 2016

सरहद और इन्सान

सरहद और इन्सान

उस ज़मीन पर पैदा हुआ था,
जिसपर आज कोई लकीर खिच गया,
कल साथ मे ही खेलने वाला बच्चा
आज काफ़िर बन गया..

लकीर के इस्स पार हो तो हिन्दुस्तानी कहलाता है,
और उस्स पार हो तो पाकिस्तानी कहलाता है,
आँखे खोलकर कोई देख नही पता की पहेले तो वो भी एक इंसान होता है,

सरहद की इस लड़ाई मे मरता एक सिपाही है,
बीवी होती है बेवा और बच्चा अनाथ कहलाता है,

कितने मासूम मरते है, ना जाने कितने बेघर होते है,
नफ़रत की इस आग मे लोग इंसानियत खोदेते है,
और मैं ने अक्सर देखा है -इंसान से नफ़रत करने वाले ही भगवान से बहुत प्यार करते है

- किरण

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